फंड मैनेजर सावधान, पर सकारात्मक
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- Category: सितंबर 2013
अधिकांश फंड मैनेजर मान रहे हैं कि भारतीय शेयर बाजार उचित मूल्यांकन पर है और वर्ष 2013 के बाकी बचे महीनों में यह सकारात्मक रहना चाहिए।
लो, फिर सेंसेक्स ने छू लिया 20,000
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- Category: सितंबर 2013
राजीव रंजन झा :
सबसे पहले एक बात आपके सामने स्वीकार करनी है। मैंने इस अंक के राग बाजारी का शीर्षक पहले रखा था -
ये फासलों का बाजार है, जरा सँभल कर सौदे करें
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- Category: सितंबर 2013
शेयर बाजार में या कमोडिटी और मुद्रा बाजार में भी बहुत-से कारोबारी तकनीकी संकेतकों या संरचनाओं के आधार पर सौदे करते हैं और मुनाफा कमाने का प्रयास करते हैं।
रुपये पर निर्भर है सोने की चमक
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- Category: सितंबर 2013
किशोर नर्ने, एसोसिएट डायरेक्टर, मोतीलाल ओसवाल कमोडिटीज :
घरेलू बाजार में हाल में सोने का भाव लगभग 35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिर कर इस समय 31,000 के नीचे आ गया है।
सीरिया में बस एक विराम, पर चिंताएँ बाकी
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- Category: सितंबर 2013
नरेंद्र तनेजा, ऊर्जा विश्लेषक :
सीरिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय तनाव हाल में कुछ कम भले ही हुआ है, मगर इसे केवल एक विराम समझना चाहिए।
एनबीसीसी दिल्ली में बनायेगी 2,000 फ्लैट
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- Category: सितंबर 2013
अगर आप दिल्ली में अपने घर का सपना देख रहे हैं, तो आपका यह सपना साकार हो सकता है।
रॉल्स रॉयस ने भारत में रैथ कार उतारी
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- Category: सितंबर 2013
ब्रिटेन की लग्जरी कार निर्माता कंपनी रॉल्स रॉयस ने अपनी नयी कार बाजार में उतारी है।
मुश्किल से बचाया पैसा, अब लगायें कहाँ!
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- Category: सितंबर 2013
राजेश रपरिया, सलाहकार संपादक :
हर बार ऐसा लगता है कि देश की अर्थव्यवस्था का भयावह दौर अब खत्म होने वाला है, पर ताजा प्रमुख आर्थिक आँकड़े देख कर यह स्थिति और भयावह लगती है।
जमीन कम, नकदी कम, दाम ज्यादा
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- Category: सितंबर 2013
सुशांत शेखर :
जमीन अधिग्रहण के नये कानून और आवास ऋण (होम लोन) की 80:20 योजना पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सख्ती से देश में जमीन-जायदाद (रियल एस्टेट) क्षेत्र की कंपनियों की मुश्किलें और बढऩे जा रही हैं।
नये कानून से भूमि 50% महँगी हो जायेगी
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- Category: सितंबर 2013
आरबीआई ने 80:20 योजनाओं पर जो रोक लगायी है, उसके दायरे में ज्यादा बिल्डर नहीं आते हैं।
कैसे बचायें अपनी जमा पूँजी
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- Category: सितंबर 2013
डोलती अर्थव्यवस्था और टूटते रुपये के बीच निवेश के सुरक्षित ठिकानों की तलाश
बाजार में कर्ज और नकदी की उपलब्धता में कमी, ऊँची ब्याज दरों, डॉलर के मुकाबले रुपये की बढ़ती कमजोरी और विभिन्न परियोजनाओं में निवेश के मोर्चे पर देरी से देश की अर्थव्यवस्था ठहर सी गयी है।
रघुराम भरोसे रुपैय्या
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- Category: सितंबर 2013
इससे पहले शायद ही किसी आरबीआई गवर्नर को ‘रॉकस्टार’ कहा गया हो।
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