नये कानून से भूमि 50% महँगी हो जायेगी
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- Category: सितंबर 2013
आरबीआई ने 80:20 योजनाओं पर जो रोक लगायी है, उसके दायरे में ज्यादा बिल्डर नहीं आते हैं।
कैसे बचायें अपनी जमा पूँजी
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- Category: सितंबर 2013
डोलती अर्थव्यवस्था और टूटते रुपये के बीच निवेश के सुरक्षित ठिकानों की तलाश
बाजार में कर्ज और नकदी की उपलब्धता में कमी, ऊँची ब्याज दरों, डॉलर के मुकाबले रुपये की बढ़ती कमजोरी और विभिन्न परियोजनाओं में निवेश के मोर्चे पर देरी से देश की अर्थव्यवस्था ठहर सी गयी है।
रघुराम भरोसे रुपैय्या
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- Category: सितंबर 2013
इससे पहले शायद ही किसी आरबीआई गवर्नर को ‘रॉकस्टार’ कहा गया हो।
अर्थव्यवस्था के नये संकटमोचक!
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- Category: अगस्त 2013
राजेश रपरिया, सलाहकार संपादक :
जब-जब पृथ्वी पर संकट आयेगा, तब-तब मैं जन्म लूँगा।
अनिश्चितता के भँवर में एनएसईएल
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- Category: अगस्त 2013
सुशांत शेखर और बृजेश श्रीवास्तव :
मार्च 2001 में कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज के डिफॉल्ट के बाद नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) भुगतान संकट में फँसने वाला पहला एक्सचेंज बन गया है।
कहाँ मिलेगा ज्यादा फायदा?
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- Category: अगस्त 2013
इक्विटी म्यूचुअल फंडों का प्रदर्शन बीते साल भर में कैसा रहा, इसे समझने के लिए पहले यह देख लेते हैं कि खुद शेयर बाजार की चाल कैसी रही।
केवल रक्षात्मक रुझान बन गया बाजार में
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- Category: अगस्त 2013
अमिष मुंशी, पीएमएस प्रमुख, टाटा एएमसी :
अगर बीते एक साल का प्रदर्शन देखें तो बाजार बहुत ध्रुवीकृत है।
अभी ज्यादा जोखिम लेने का समय नहीं
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- Category: अगस्त 2013
अनिल चोपड़ा, सीईओ, बजाज कैपिटल :
दरअसल म्यूचुअल फंड उद्योग का प्रदर्शन सीधे-सीधे इस बात से जुड़ा है कि विभिन्न फंड योजनाएँ जिन संपत्ति-वर्गों में निवेश करती हैं उनका प्रदर्शन कैसा रहा है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की पसंद
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- Category: अगस्त 2013
इक्विटी, विविध (डाइवर्सिफाइड)
फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा प्लस : यह सबसे स्थिर और नियमित रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंडों में से एक है। यह अधिक जोखिम पर अधिक लाभ देने वाला फंड है।
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की पसंद
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- Category: Uncategorised
हाल का समय म्यूचुअल फंड क्षेत्र के लिए आसान नहीं रहा है।
5400 टूटने पर बजेगी खतरे की घंटी
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- Category: अगस्त 2013
राजीव रंजन झा :
पिछले अंक के राग बाजारी में मैंने यह प्रश्न रखा था कि सेंसेक्स के लिए कितनी गुंजाइश है 20,000 से आगे जाने की?
इतने बुरे भी नहीं हैं हालात
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- Category: अगस्त 2013
वित्त वर्ष 2012-13 में जीडीपी विकास दर एक दशक के निचले स्तर 5% तक फिसल जाने के बाद बाजार और विश्लेषकों की नजरें अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों के नतीजों पर टिकी थीं।
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