रिलायंस इंडस्ट्रीज : निराश नहीं किया नतीजों ने
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- Category: नवंबर 2012
भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने जुलाई-सितंबर 2012 की तिमाही के दौरान 5376 करोड़ रुपये का मुनाफा हासिल किया है।
निफ्टी का अगला स्वाभाविक लक्ष्य है 5978
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- Category: नवंबर 2011
राजीव रंजन झा :
महीने भर पहले निवेश मंथन के अक्टूबर अंक में मैंने प्रश्न रखा था कि क्या निफ्टी दशहरा-दीपावली तक 6000 पर चला जायेगा?
रिलायंस गैस विवाद : कुछ छिपाना नहीं तो जाँच से परेशानी क्या?
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- Category: नवंबर 2012
नरेंद्र तनेजा, ऊर्जा विशेषज्ञ :
अरविंद केजरीवाल ने रिलायंस के केजी डी6 ब्लॉक के बारे में जो बातें कही हैं, उनमें उनकी ओर से सामने रखा गया कोई नया तथ्य नहीं है।
शीतकालीन सत्र : सरकार को खतरा नहीं अविश्वास प्रस्ताव से
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- Category: नवंबर 2012
राजेश रपरिया :
कांग्रेस ने अब निर्णय कर लिया है कि विपक्षी आक्रमणों को निश्तेज करने के लिए खुदरा बाजार में विदेशी निवेश के फैसले को ही अपनी मुख्य ढाल बनायेगी।
दीपावली खरीदारी : बरकरार रहेगी ब्रांडेड गहनों की चमक
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- Category: नवंबर 2012
रीतू तोमर :
दीवाली पर ज्वेलरी कंपनियाँ ब्रांडेड गहनों की बिक्री के लिए लुभावने ऑफर लेकर आ रही हैं।
जब दिल माँगे कुछ नया, कुछ बेहतर
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- Category: नवंबर 2012
इस त्योहारी मौसम में बाजार में नये-नये स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप आपका इंतजार कर रहे हैं।
जगमगाती रोशनी संग मिले नयी रफ्तार
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- Category: नवंबर 2012
क्या आप भी रफ्तार की नयी सवारी करने के लिए त्योहारी मौसम का इंतजार कर रहे हैं और उलझन में हैं कि बाजार में उपलब्ध तमाम विकल्पों की भरमार के बीच क्या चुनें?
जहाँ न पहुँचे बैंक, वहाँ पहुँचा सहारा!
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- Category: सिंतंबर 2012
राजेश रपरिया, सलाहकार संपादक :
हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने सेबी के एक निर्णय को सही ठहराते हुए सहारा ग्रुप की दो कंपनियों को 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम 15% ब्याज के साथ तीन महीने में निवेशकों को लौटाने के आदेश दिये हैं। इस मुकदमे की कार्रवाई के दौरान ऐसे तथ्य निकल कर आये हैं, जिन्होंने आर्थिक जगत के कई मिथकों को झुठलाते दिख रहे हैं। इन तथ्यों को मानें तो यह भी मानना होगा कि ग्रामीण भारत शहरी भारत से ज्यादा संपन्न है और पूँजी बाजार की ओर ग्रामीण भारत का रुझान देश के शहरी निवेशकों से ज्यादा है। यह बात गले नहीं उतरती। शायद इसीलिए उच्चतम न्यायलय को इस तिलिस्म को भेदने के लिए ज्यादा व्यापक और सख्त आदेश देने पड़े हैं।
गलत नीति, गड़बड़ आवंटन
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- Category: सिंतंबर 2012
नरेंद्र तनेजा, ऊर्जा विशेषज्ञ :
कोयला घोटाले पर पक्ष-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, लेकिन घोटाला तो हुआ है, चाहे उसे आप किसी भी नजर से देखें। इसकी जो नीति बनायी गयी, वह ढह गयी और अमल में भी खामियाँ रहीं। कोयला सचिव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को सचेत किया, लेकिन फिर भी कुछ नहीं किया गया। बाद में नीलामी का निर्णय लिया गया, लेकिन उसको भी लागू नहीं किया गया। तमाम ऐसी कंपनियों को भी कोयला ब्लॉक दे दिये गये, जिन्हें इस क्षेत्र का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था और बिल्कुल नौसिखिया थीं।
एक करोड़ की सुरक्षा
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- Category: सिंतंबर 2012
राजीव रंजन झा :
नोएडा में रहने वाले पंकज गोयल की आयु 45 वर्ष और व्यक्तिगत सालाना आमदनी 2.20 लाख रुपये है। इनके पिता ने जब इनसे कहा तो इन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से एक बीमा करवा लिया। लेकिन इस योजना के नफा-नुकसान के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। उन्हें यह भी मालूम नहीं है कि उनकी इस योजना में कुल बीमा राशि कितनी है। उन्हें बस इतना पता है कि सालाना 18,889 रुपये की दो किस्तें जाती हैं।
धीमापन जारी रहने की आशंका
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- Category: सिंतंबर 2012
अभीक बरुआ, मुख्य अर्थशास्त्री, एचडीएफसी बैंक :
पिछले साल की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की विकास दर 8% थी और यह अब घट कर 5.5% पर आ गयी है। निश्चित रूप से हमारी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है। मेरा मानना है कि कारोबारी साल 2012-13 के अंत तक हमारी विकास दर 5.5% या इससे थोड़ी अधिक रह सकती है। पिछले साल के औसत स्तर से इस साल हमारी विकास दर नीची ही रहेगी।
शेयर बाजार
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- Category: सिंतंबर 2012
अगर शेयर भाव एक स्तर से नीचे आ जायें तो प्रमोटरों को कुछ भुगतान करना पड़ता है या और अधिक शेयर गिरवी रखने पड़ते हैं। प्रमोटर अतिरिक्त भुगतान नहीं कर पाये या मार्जिन के तौर पर अतिरिक्त शेयर नहीं दे पाये तो कर्ज देने वाले को यह अधिकार होता है कि वह खुले बाजार में उन शेयरों को बेच दे।
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