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एसएमई पंजीकरण के हैं फायदे ही फायदे

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Category: अगस्त 2011

सुशांत

छोटे और मँझोले उद्योग भारतीय उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। देश के कुल निर्यात में 40% योगदान इसी क्षेत्र का है। एक अनुमान के मुताबिक छोटे और मँझोले उद्योग 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में ज्यादातर उद्योग असंगठित हैं और इससे इन्हें कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है।

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बाजार टूटे तो क्या एसआईपी तोड़ दें?

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Category: अगस्त 2011

शिवानी भास्कर

शेयर बाज़ार में निवेश के संबंध में दो एकदम विरोधाभासी बातें प्रचलित हैं। पहली बात यह कि यहाँ सही समय में अपने निवेश का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। दूसरी बात यह कि शेयर बाजार में बिल्कुल सही समय कभी नहीं पकड़ा जा सकता, यानी शेयर बाजार को तेजी और मंदी के हर चक्र के बिल्कुल निचले हिस्से में पकडऩा और ऊपरी हिस्से में छोडऩा नामुमकिन है। चाहे दुनिया के सबसे सफल निवेशक वारेन बफेट हों या भारत के सबसे मशहूर निवेशक राकेश झुनझुनवाला, सबने अनगिनत बार यही बात कही है।

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जोखिम उठा सकते हैं तो चाँदी में निवेश बेहतर

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Category: अगस्त 2011

जयंत मांगलिक, प्रेसिडेंट, रेलिगेयर कमोडिटीज

हाल में चाँदी के भावों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन मेरे विचार से अब इसका उतार-चढ़ाव खत्म होने वाला है। इसलिए वर्तमान कीमतों पर चाँदी में खरीदारी करना अच्छा रहेगा। अगर कोई एक साल का नजरिया रखे तो दूसरी कमोडिटी की अपेक्षा यह एक अच्छा निवेश होगा। अगर अभी सोना और चाँदी के बीच तुलना करें तो सोना भी निवेश के लिए अच्छा लग रहा है। लेकिन सोने के भावों में उतार-चढ़ाव कम है। इसलिए एक निवेशक शायद चाँदी की अपेक्षा सोने में निवेश को प्राथमिकता दे सकता है, क्योंकि उसमें अस्थिरता कम है।

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सोने के गहनों पर भारी है गोल्ड ईटीएफ

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Category: अगस्त 2011

सोने पर कर्ज देने वाली एक कंपनी आपको बताती है कि जब घर में पड़ा हो सोना, तो फिर काहे का रोना। लेकिन सोने के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ के चलते आप कह सकते हैं कि जब घर में ना हो सोना, तब चैन की नींद तुम सोना! आप सोने में निवेश करें, उसे खरीदें, लेकिन घर लाने की क्या जरूरत है? घर में पड़ा सोना तो चोरों को न्यौता देता है। इसलिए आप सोने को घर में रखे बिना भी सोने में निवेश का फायदा ले सकते हैं गोल्ड ईटीएफ से।

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बढ़ता ब्याज, महँगे होते सपने

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Category: अगस्त 2011

शिवानी भास्कर

ईएमआई बढऩे से घर-घर की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। पर ब्याज दरों का बढऩा जारी है...
राकेश मेहता आजकल अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। केवल साल भर पहले जब उन्होंने राजधानी दिल्ली की सीमा से 10 किलोमीटर दूर अपना एक आशियाना बुक कराया, तो खुशी से उन्हें ऐसा लगा कि अब कोई और ख्वाब पूरा करना बाकी न बचा हो। केवल 3 साल का इंतजार और फिर अपनी छत का सुख। 

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धीमी पड़ी, पर बुरी नहीं यह विकास दर

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Category: अगस्त 2011

धर्मकीर्ति जोशी, निदेशक और मुख्य अर्थशास्त्री, क्रिसिल

भारतीय अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है, इस बात में कोई दो राय नहीं है। हमारा मानना है कि 2011-12 में भारतीय अर्थव्यवस्था के बढऩे की रफ्तार कुछ और कम हो जायेगी। क्रिसिल ने साल 2011-12 में 7.7%-8% विकास दर (जीडीपी वृद्धि) का अनुमान लगाया है।

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बस दाम बढ़ा देने से नहीं बनेगी बात

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Category: अगस्त 2011

नरेंद्र तनेजा, ऊर्जा विशेषज्ञ

डीजल की कीमत बढ़ाने के बारे में फैसला करने में सरकार को थोड़ा समय लगने का कारण यही है कि डीजल राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील है। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार बस थोड़ा समय ले रही है और डीजल के दाम बढ़ाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। सरकार किसी भी समय ज्यादा तो नहीं, लेकिन 2.50 रुपये प्रति लीटर के करीब बढ़ा सकती है।

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बैंक और टेलीकॉम में मिल रही हैं ज्यादा नौकरियाँ

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Category: अगस्त 2011

रोजगार

अगर आप इस समय नयी नौकरी की तलाश में हैं तो यह आपके लिए अच्छा समय है। मई 2010 की तुलना में मई 2011 के दौरान कंपनियों ने काफी ज्यादा नौकरियाँ दी हैं। नौकरी डॉट कॉम ने नौकरियों का घटना-बढऩा मापने के लिए एक जॉब स्पीक सूचकांक बना रखा है, जो इस दौरान 19% ऊपर आ गया है।

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चढ़ रही हैं कीमतें

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Category: अगस्त 2011

जमीन-जायदाद

जमीन-जायदाद की कीमतों में नरमी की उम्मीदों के बावजूद ताजा आँकड़े बता रहे हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी रुकी नहीं है। कम-से-कम इस साल की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2011 के दौरान तो यही रुख दिखा है। इस क्षेत्र के लिए सलाहकार सेवाएँ देने वाली कंपनी जेएलएल की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2009 की दूसरी छमाही से ही भारत के आवासीय क्षेत्र में कीमतें बढऩे का सिलसिला दिख रहा है और 2011 की पहली तिमाही में भी यही रुझान जारी रहा।

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आखिर परवान चढ़ा कैर्न वेदांत सौदा

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Category: अगस्त 2011

अगस्त 2010 से लटका हुए कैर्न वेदांत सौदे को आखिरकार हरी झंडी मिल गयी। थोड़ा अनिल अग्रवाल झुके, ब्रिटेन की कंपनी कैर्न एनर्जी पीएलसी भी थोड़ा झुकी और सरकार का आशीर्वाद मिल गया। वैसे तो नये समझौते में कैर्न के साथ यह सौदा वेदांत समूह के लिए 60 करोड़ डॉलर सस्ता हो गया, लेकिन पहले सरकारी आशीर्वाद के बिना यह सौदा कर डालना कितना महँगा पड़ा, यह तो अनिल अग्रवाल ही जानते होंगे!
इस बीच अप्रैल 2011 में भारत का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) 6.3% की दर से बढ़ा। यह दर आधार वर्ष (बेस ईयर) बदलने के बाद की है। अगर पुराने आधार वर्ष के मुताबिक देखें तो अप्रैल में आईआईपी 4.4% बढ़ी, जो जानकारों के अनुमान से कुछ कम ही रही। हालाँकि नये आधार वर्ष से तय किये गये आँकड़ों को जानकार औद्योगिक उत्पादन की ज्यादा बेहतर तस्वीर मान रहे हैं।
थोड़े धीमे विकास के बीच ऊँची महँगाई दर और ऊँची ब्याज दर के इस दौर में बाजार और सरकार का चिंता में पडऩा लाजिमी है।
(निवेश मंथन, अगस्त 2011)

पर हम होंगे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

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Category: अगस्त 2011

आज भले ही अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती रफ्तार को लेकर चिंता हो रही हो, लेकिन भविष्य अब भी सुनहरा ही दिख रहा है। भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, यह भविष्यवाणी करने वालों में अब स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक भी शामिल हो गया है।

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थोड़ी खुशी ज्यादा गम

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Category: अगस्त 2011

जनवरी-मार्च 2011 यानी बीते कारोबारी साल की चौथी तिमाही के नतीजों में बाजार को खुशी कम मिली, झटके ज्यादा मिले। इसकी शुरुआत तो इन्फोसिस से ही हो गयी, जिसके नतीजों के साथ हर तिमाही नतीजों के मौसम की एक तरह से शुरुआत मानी जाती है। ऐसे कुछ खास नामों पर नजर, जिन्होंने बाजार को मायूस या खुश किया।

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  1. ओएनजीसी : आगे दारोमदार सब्सिडी के बोझ पर ही
  2. भारतीय स्टेट बैंक : निजाम बदलते ही लगा जोर का झटका
  3. रिलायंस इंडस्ट्रीज : गैस उत्पादन की चिंता सबसे भारी
  4. बीएचईएल : मुनाफे में तेज बढ़त पर भी बाजार नाखुश

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2011 127

ई-पत्रिका 37

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