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फायदेमंद है खुदरा एफडीआई

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Category: दिसंबर 2011

एसएमई के लिए राजीव कुमार, महासचिव, फिक्की :

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने से देश में एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) विकसित हो सकेगी। इससे किसानों और छोटे-मँझोले उद्यमों (एसएमई) को आधुनिक व्यापार प्रक्रिया से जोड़ा जा सकेगा। तभी किसानों और एसएमई को अपने उत्पादों के लिए अच्छी कीमत भी मिल सकेगी और कीमतें तय करने की प्रणाली ज्यादा पारदर्शी बनेगी।

मेरी समझ से छोटे-मँझोले उद्यमों को इसके कई फायदे मिलेंगे :

-          उन्हें प्राइवेट लेबल उत्पादों को तैयार करते समय गुणवत्ता, प्रक्रिया, योजना आदि के लिए सही जानकारी मिल सकेगी।

-          उपभोक्ताओं की नयी मांगों को देख कर नये उत्पादों को विकसित करने में वे साझेदार बन सकेंगे।

-          वे बाकायदा कानूनी समझौतों के तहत कारोबार कर सकेंगे, जिसमें सारी शर्तें और स्थितियाँ सुगठित और पेशेवर ढंग से होंगी।

-          उन्हें आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की जानकारी मिलेगी, जिससे वे लागत और संभावित घाटे को न्यूनतम कर सकेंगे। उन्हें सही समय पर भुगतान मिलेगा।

-      उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यवर्ती बाजारों तक पहुँचने के मौके मिलेंगे। बड़ी खुदरा कंपनियाँ अपने सप्लायरों को उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने का मौका देती हैं, जिससे वे उपभोक्ताओं की माँग के मुताबिक खुद को ढाल सकें।इससे सप्लायर अपनी क्षमता को सुधार कर नये बाजारों तक जा सकने लायक बनते हैं।     

 (निवेश मंथन, दिसंबर 2011)

सरकारी दावों में दम नहीं

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Category: दिसंबर 2011

राजेश रपरिया :

यूपीए-2 सरकार रिटेल में 51% प्रत्यक्षविदेशी निवेश (एफडीआई) को अनुमति देने के फैसले को कुछऐसे पेश कर रही थी, मानो इससे देश की तकदीर बदल जायेगी।लेकिन इस फैसले ने यूपीए सरकार की तकदीर पर ही ग्रहण लगा दिया है।

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इन्फोसिस पहुँचा लक्ष्य तक, सुजलॉन पिटा

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Category: दिसंबर 2011

राजीव रंजन झा :

शेयर बाजार : आर या पार:अभी टला नहींखतरा

सबसे पहले तो आपको निवेश मंथन के सितंबर 2011 अंक के राग बाजारी का शीर्षक याद दिला दूँ – ‘अगले दो महीनों में 5400 पर?’ उस समय निफ्टी 5000 के करीब था और 28 अक्टूबर को इसने ठीक 5400 का स्तर छू लिया। खैर, बाजार की कई बातें अभी अक्टूबर 2008 से मार्च 2009 के दौर की याद दिला रही हैं। बात केवल इतनी नहीं है कि मार्च 2009 में रुपये ने डॉलर की तुलना में अपना ऐतिहासिक निचला स्तर छू लिया था और हाल में एक बार फिर रुपया डॉलर की तुलना में ऐतिहासिक निचले स्तर पर चला गया। दरअसल बाजार में निराशा अपने चरम पर है।

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कसौटी : पिछले चुनिंदा शेयरों का हाल

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Category: दिसंबर 2011

रिलायंस इंडस्ट्रीज : हमने अक्टूबर अंक में लिखा था कि यह 465-1,268 की 61.8% वापसी के स्तर 772 पर सहारा लेता दिख रहा है। इस स्तर से सहारा लेकर यह शेयर नवंबर के पहले हफ्ते में 905 रुपये तक गया और इस समय फिर से 772 के आसपास लौट आया है।

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डाबर इंडिया : शतक लगने का इंतजार

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Category: दिसंबर 2011

डाबर इंडिया ने इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया था,जो बाजार के अनुमानों से थोड़ा आगे था।इसकी तिमाही कंसोलिडेटेड सकल बिक्री सालाना आधार पर 29.5% बढ़ कर 1,270 करोड़ रुपये हो गयी। इस बढ़ोतरी में बिक्री की मात्रा 10% बढऩे का भी योगदान रहा।

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नवनीत पब्लिकेशंस : मुनाफे का पाठ

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Category: दिसंबर 2011

नवनीत पब्लिकेशंस अब किताबों और स्टेशनरी के क्षेत्र में एक स्थापित नाम बन चुकी है। आगे चल कर इसके कारोबार में और अच्छी बढ़त दिखसकती है। इसके दो कारण हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि एक तो अगले दो सालों में पाठ्यक्रमों में होने वाले बदलाव की वजह से इसकी बिक्री बढ़ेगी, साथही ई-लर्निंग के कारोबार में भी इस कंपनी की दखल बढ़ रही है।

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गिरवी शेयरों से निवेशकों में डर

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Category: दिसंबर 2011

अगर हम बीती 10 तिमाहियों के आँकड़े देखें तो सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटरों की 9-10% हिस्सेदारी गिरवी रही है।

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पेट्रोल-डीजल : राहत देना अब राज्यों के हाथ में

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Category: दिसंबर 2011

शिवानी भास्कर :

पेट्रोल और डीजल की कीमतें यूँ तो सीधे-सीधे आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई हैं, लेकिन अपने देश में इसका साबका आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक परिणामों से पड़ता है। पिछले तीन साल में पहली बार 16 नवंबर को तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में कमी की। दिल्ली में 2.22 रुपये की कमी के बाद पेट्रोल की कीमत 66.42 रुपये है।

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हवाई-सेवा : विजय माल्या का दरक रहा साम्राज्य

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Category: दिसंबर 2011

सुशांत शेखर :

भारतीय उद्योग जगत के ग्लैमर किंग कहे जाने वाले विजय माल्या के सितारे इन दिनों गर्दिश में चल रहे हैं। माल्या की कर्ज में डूबी किंगफिशर एयरलाइंस की हालात इतनी खराब हो गयी है कि उन्हें सरकार से मदद की गुहार लगानी पड़ी है।

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मीडिया पर बरसे माल्या

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Category: दिसंबर 2011

किंगफिशर के इस संकट को देखते हुए फेसबुक और ट्विटर जैसी वेबसाइटों पर काफी लोग पूछ रहे हैं कि क्या इस बार भी किंगफिशर कैलेंडर छपेगा? इसका जवाब यूबी समूह के प्रमुख विजय माल्या ने ट्विटर पर दिया।

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बढ़ गयी चीनी की मिठास

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Category: दिसंबर 2011

डॉ. प्रसून माथुर, वरिष्ठ विश्लेषक, रेलिगेयर कमोडिटीज

अक्टूबर में शुरू हुए चीनी के नये मौसम में भारत में शानदार उत्पादन होने की आशा बनी है। ज्यादातर विश्लेषक मान रहे हैं कि 2011-12 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 2.6 करोड़ टन रह सकता है।

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चीनी निर्यात की अनुमति

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Category: दिसंबर 2011

सरकार ने नवंबर में ही मुक्त सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत इस चीनी वर्ष 2011-12 के दौरान 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है।

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  1. ड्रैगन को चाहिए सोने का मुकुट
  2. बचत के नुस्खे
  3. सटीक अनुमान मुनाफे में न बदलने का गम
  4. मध्यम और सस्ते घरों के दाम बढ़ेंगे

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ई-पत्रिका 31

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