अनिल अग्रवाल का बड़ा दाँव, वेदांत समूह पुनर्गठन
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- Category: मार्च 2012
सुशांत शेखर :
वेदांत रिसोर्सेस पीएलसी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल बड़ी पहल करने के लिए जाने जाते हैं। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और सेसा गोवा के विलय का ऐलान करके अनिल अग्रवाल ने एक झटके में अपनी होल्डिंग कंपनी वेदांत रिसोर्सेस पीएलसी का 61% कर्ज घटाने का इंतजाम कर लिया। यह विलय शेयरों के लेनदेन के जरिये होगा। विलय के बाद सेसा गोवा का नाम बदल कर सेसा स्टरलाइट हो जायेगा। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के निवेशकों को अपने 5 शेयरों के बदले सेसा स्टरलाइट के 3 शेयर मिलेंगे।
कहीं और क्यों जाना, एलआईसी है ना!
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- Category: मार्च 2012
ओएनजीसी विनिवेश :
अखबार की एक खबर बता रही है कि ओएनजीसी के 42.78 करोड़ सरकारी शेयरों की नीलामी में से 40 करोड़ शेयर अकेले भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के खाते में गये हैं। कुछ अन्य खबरों के मुताबिक एक मार्च को 3.30 बजे नीलामी खत्म होने के समय कुल 29.22 करोड़ शेयरों की बोलियाँ आयी थीं, लेकिन अंत में कुल 42.78 करोड़ शेयरों में से 42.04 करोड़ शेयरों की बोलियाँ लगीं। इन खबरों में कहा गया कि एलआईसी के साथ-साथ एसबीआई ने भी इस नीलामी में शेयरों का बड़ा हिस्सा उठाया, हालाँकि कुछ अपुष्ट अटकलों में कहा गया कि एसबीआई ने अपनी बोलियाँ बाद में वापस ले लीं।
सबको है मार्च का इंतजार
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- Category: फरवरी 2012
राजेश रपरिया, सलाहकार संपादक
टेलीकॉम घोटाले में अदालती निर्णयों से एक अरसे से छायी धुंध छँट गयी है। ऐसा लगता है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को कारोबारी जगत ने सकारात्मक ढंग से ही लिया है। कम-से-कम शेयर बाजार की प्रतिक्रिया से यही लगता है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में हुए फर्जीवाड़े का देश के सामने रहस्योद्घाटन तो हो गया, लेकिन कई अनुत्तरित सवाल भी रह गये।
‘लाइसेंस राजा’ पर अदालती हथौड़ा
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- Category: फरवरी 2012
सरकार और कॉर्पोरेट क्षेत्र के दिग्गजों के खिलाफ कुछ चुनिंदा व्यक्तियों की यह लड़ाई सफलता के इस अंजाम तक पहुँच सकेगी, यह सोचने वाले लोग शुरुआत में कम ही होंगे। संचार (टेलीकॉम) क्षेत्र का विवादों से पुराना नाता रहा है।
सबसे बड़ी अदालत के जवाब
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- Category: फरवरी 2012
क्या सरकार संविधान में शामिल समानता के बुनियादी हक के अनुरूप कोई उचित और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाये बिना प्राकृतिक संसाधन या राष्ट्रीय संपत्ति किसी को देने या बाँटने का अधिकार रखती है?
2जी घोटाला, अब तो चीजें दुरुस्त कर ले सरकार
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- Category: फरवरी 2012
राजीव रंजन झा :
इंटरनेट पर एक कार्टून तेजी से फैल रहा है, जिसमें मोबाइल टावरों की शर-शैय्या (तीरों से बने बिछावन) पर डॉ. मनमोहन सिंह लेटे हैं। इस कार्टून में जो कहने की कोशिश की गयी है, वह तो लोगों के दिलों तक तुरंत पहुँचती है। लेकिन भीष्म पितामह के इस मिथक को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जोडऩे में एक अड़चन है।
चिदंबरम को मिली 2जी मामले में राहत
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- Category: फरवरी 2012
गृह मंत्री पी चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह-अभियुक्त बनाने की मांग इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत ने नामंजूर कर दी है।
2जी घोटाला, एक तराजू में न तौलें शौरी और राजा को
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- Category: फरवरी 2012
महेश उप्पल, निदेशक, कॉम फस्ट इंडिया :
टेलीकॉम क्षेत्र में जिस महत्वपूर्ण और कठिन सुधार से अभी तक राजनीतिज्ञ और अफसर हिचकिचा रहे थे, वह काम न्यायालय ने कर दिया है। इसके लिए हमें अदालत का आभार मानना चाहिए। पहले आओ पहले पाओ नीति के बारे में दो चीजें हैं।
फैसले से किस पर कितना असर
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- Category: फरवरी 2012
2जी घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का दूरगामी असर पडऩे की उम्मीद जतायी जा रही है। इस फैसले से ग्राहकों, कंपनियों और उनके कर्मचारियों के साथ भारत में विदेशी निवेश पर भी असर पडऩे की बात की जा रही है। आइये देखते हैं कि इस फैसले का किस पर कितना असर पड़ सकता है।
रिलायंस का मुनाफा दूसरी तिमाही से 22.2% कम
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- Category: फरवरी 2012
बाजार में पहले से चल रहे अंदेशों के मुताबिक ही रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तीसरी तिमाही के कमजोर नतीजे सामने रखे हैं। हालाँकि कंपनी के कुल कारोबार में अक्टूबर-दिसंबर 2011 की तिमाही में 40.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, लेकिन इसकी एबिटा आय और मुनाफे में काफी कमी आयी है।
बजट में बस बहीखाता या नयी दिशा?
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- Category: फरवरी 2012
शिवानी भास्कर :
साल की शुरुआत का यह ऐसा समय होता है, जब पूरे देश का अर्थतंत्र एक ही तैयारी में जुटा होता है- अगले वित्त वर्ष का बजट। जहाँ तमाम उद्योग संगठन और अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधि अपने-अपने हितों के लिए वित्त मंत्रालय के साथ बैठकें कर उसे अपनी मांगों की सूचियाँ थमाते हैं, वहीं सरकारी विभाग और मंत्रालय भी अपनी-अपनी माँगों के साथ मान-मनुहार में लग जाते हैं।
केंद्र का नहीं, पूरे देश का बजट बने
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- Category: फरवरी 2012
बजट से पूरे देश और दुनिया को यह संदेश देना होगा कि भारत सरकार की आर्थिक सुधार की जो रेल गाड़ी पटरी से उतर चुकी है, उसे वापस पटरी पर डाला जा रहा है। बजट केवल वार्षिक बहीखाता नहीं होता है। सबसे बड़ा मुद्दा यह होता है कि अगले 12 महीनों में देश की दिशा क्या रहेगी, नीतियों के स्तर पर और विभिन्न क्षेत्रों में किन बातों को प्राथमिकता दी जायेगी। पिछले 12 महीनों के अंदर हमने देखा है कि हमारा देश आर्थिक मसलों को लेकर लगभग दिशाहीन हो चुका है।
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