संदीप जून, सीनियर रिसर्चएनालिस्ट, एसएमसी कॉमट्रेड :
साल 2011 में शुरू हुई तीखी गिरावट के बाद सोने ने 2016 में तेजी से वापसी की है। इसकी कीमत 2 वर्ष से अधिक के उच्च स्तर पर पहुँच गयी और 2016 की पहली छमाही पिछले एक दशक में सोने के लिए सबसे बेहतर पहली छमाही रही। चीन की दुर्बल अर्थव्यवस्था, विश्व के उदास आर्थिक वातावरण, ईटीएफ की ओर से बढ़ती माँग, बड़े केंद्रीय बैंकों की कम ब्याज दर रखने की नीतियाँ, ब्रेक्सिट की वजह से राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएँ - 2016 की पहली छमाही में सोने को मजबूती देने वाले यही प्रमुख कारण हैं।
हालाँकि पहली छमाही में शानदार उछाल के बाद गर्मियों के महीनों में सोने की कीमतें एक दायरे में चलती रहीं, जिससे चौथी तिमाही में तेज गिरावट का रास्ता बना। इसलिए चौथी तिमाही में सोने की कीमतों के टिकने पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि कॉमेक्स में 1300 डॉलर प्रति औंस और एमसीएक्स में 30,000 रुपये का समर्थन स्तर टूट गया है। हालाँकि पीली धातु में अब मूल्य के लिहाज से थोड़ा सुधार हो रहा है और ऐसे कई कारक हैं जिनसे सोने की कीमतों को आने वाले महीनों में सहारा मिल सकता है।
अमेरिका में दर वृद्धि
अमेरिका में ब्याज दरों में वृद्धि को लेकर लगातार चल रही बहस ने सोने के प्रति बाजार धारणा को नुकसान पहुँचाया है। हालाँकि फेडरल रिजर्व मौद्रिक सख्ती की राह पर धीरे-धीरे ही आगे बढ़ेगा, जो लंबी अवधि में सोने की कीमत के लिए एक सकारात्मक पहलू है। हालाँकि यह माना जाता है कि ब्याज दरों में वृद्धि से सोने की कीमत में गिरावट आती है, क्योंकि इससे सोने में निवेश बनाये रखने की अवसर लागत बढ़ती है। लेकिन ब्याज दरों में वृद्धि के बीच भी ऐसे कई कारक हैं, जो सोने को चढ़ाते हैं। सामान्यत: ब्याज दर में जल्दी ही वृद्धि होने की संभावना से सोने की कीमतों पर नकारात्मक असर होता है, मगर ब्याज दरों में वृद्धि हो जाने के बाद वे एक तलहटी बना कर ऊपर चढऩा शुरू करती हैं। इस साल एक बार ब्याज दर वृद्धि की संभावना को बाजार सोने के मौजूदा भावों में शामिल कर चुका है। इसलिए आखिरकार सोने में खरीदारी उभरने की उम्मीद रहेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में काँटे का मुकाबला होगा। भले ही डोनाल्ड ट्रंप को पीछे माना जा रहा हो, पर यदि ट्रंप राष्ट्रपति बने तो अमेरिकी राजनीति में ध्यान देने योग्य बदलाव होंगे। उनकी नीतियों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव की वजह से अनिश्चितता बढ़ेगी। इससे सोने की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
ईटीएफ और भौतिक माँग
भारत में औसत से बेहतर मानसून रहने के बाद आने वाले महीने त्योहारों और शादियों के मौसम के हैं। इस कारण भारत में सोने की माँग 2016-17 में पिछले सितंबर से अगस्त के फसल सत्र से अधिक बढऩे की उम्मीद है। इससे भारत में दूसरी तिमाही में गहनों की कमजोर माँग रहने की प्रवृत्ति से उलट नतीजे आयेंगे, क्योंकि कीमतों में नरमी का वर्तमान चरण निचले स्तरों पर खरीदारों को आकर्षित करेगा। ईटीएफ की ओर से माँग भी मजबूत बनी हुई है। डब्ल्यूजीसी के अनुसार 2016 की पहली छमाही में इस क्षेत्र में 579.2 टन का नया निवेश हुआ है, जबकि इससे पहले की 10 तिमाहियों के दौरान 616.1 टन निकासी हुई थी।
चीन में भौतिक माँग बढ़ी
स्विस फेडरल कस्टम ऐडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार स्विट्जरलैंड से चीन के लिए सोने का निर्यात सितंबर 2016 में 35.5 टन रहा, जो अगस्त 2016 में 19.9 टन था।
कीमतों की दिशा
वर्ष 2016 सोने में चमक लौटने के साथ शुरू हुआ। मगर इस साल की शुरुआत में सोने में तेजी दिखने के बाद हाल में इसमें तेजी से गिरावट आयी है। वैश्विक कीमतें जुलाई में 2 वर्ष से अधिक के उच्च स्तर से 8% की गिरावट दर्ज कर 1,250 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे आ गयी हैं। मगर इसके बाद भी इस साल की शुरुआत से यह लगभग 20% ऊपर ही है, क्योंकि केंद्रीय बैंकों ने विकास दर को प्रोत्साहित करने के लिए बॉन्ड-खरीदारी को ज्यादा समय तक विस्तार दिया है या दरों को कम या नकारात्मक स्तर पर रखा है। निवेशकों ने सर्राफा आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में इस साल 40% तक निवेश बढ़ाया है जो 3 साल की सबसे बड़ी वृद्धि है।
कीमत में आयी गिरावट से उपभोक्ताओं और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा अवसर मिलेगा। अधिक अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशकों के पोर्टफोलिओ में सोने का एक महत्वपूर्ण स्थान है।
कॉमेक्स में सोने को मध्यम अवधि (3-6) महीनों में 1213-1242 डॉलर के आसपास सहारा मिल सकता है और वहाँ से यह वापस सँभल कर 1,340-1,380 डॉलर के स्तरों की ओर जा सकता है। एमसीएक्स में सोना 28,500-29,300 रुपये के पास समर्थन हासिल कर 30,600-31,500 रुपये की ओर बढ़ सकता है।
(निवेश मंथन, नवंबर 2016)