मार्च के शुरुआती 3 सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार 8% से ज्यादा टूट चुका है। और यह गिरावट एक ऐसे युद्ध के चलते आयी है, जिसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
इस युद्ध में भारत न किसी के पक्ष में खड़ा है, न किसी के विरोध में। पर यह युद्ध हमारे लिए तेल-गैस की आपूर्ति को बाधित भी कर रहा है और इसे महँगा भी बना रहा है। कब तक चलेगा यह युद्ध? ज्यादा लंबा खिंचा, जो होता अभी दिख रहा है, तो हम पर क्या असर होगा? इसके चलते लगातार फिसलते बाजार में निवेशक क्या करें? ऐसे तमाम प्रश्नों का उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कर रही है निवेश मंथन के फरवरी 2026 अंक की आमुख कथा।
इस गंभीर मुद्दे को शेयर बाजार के नजरिये से समझने के लिए हमने बातचीत की है आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च प्रमुख पंकज पांडेय और इनॉक वेंचर्स के एमडी विजय चोपड़ा से। इसके भूराजनीतिक पहलुओं को सामने रखा है वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी ने। साथ ही, देश के प्रमुख उद्योगपति और वेदांत समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया है कि इस संकट की पृष्ठभूमि में सरकार किस तरह के सुधार करे, जिससे देश तेल, तांबा, सोना आदि के मामले में आत्मनिर्भर हो सके। वहीं, धन के सह-संस्थापक जय प्रकाश गुप्ता बता रहे हैं कि क्यों कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर नहीं टिकेंगी।
देश की जीडीपी को मापने के नये तरीके की विस्तृत समीक्षा भी इस अंक में है। साथ में म्यूचुअल फंड, सर्राफा बाजार, अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट से जुड़े अन्य कई रोचक एवं जानकारियों से भरे लेख भी मिलेंगे।
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Nivesh Manthan Emagazine Feb 2026
(कॉपीराइट : निवेश मंथन)

