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| किराने पर कोहराम |
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| द्वारा लिखित निवेश मंथन |
| मंगलवार, 27 दिसम्बर 2011 08:02 |
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सरकार ने नीतिगत मोर्चे पर लकवाग्रस्त होने की छवि को तोड़ने के लिए खुदरा (रिटेल) क्षेत्र में 51% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने का फैसला तो किया, लेकिन यह फैसला उसके गले की हड्डी बन गया। अपने सहयोगियों के ही पुरजोर विरोध के चलते सरकार सुधारों के मोर्चे पर एक कदम आगे दो कदम पीछे चलती दिख रही है। एक बड़े फैसले से पहले नफा-नुकसान समझने और जनमत तैयार करने में नाकामी भारी पड़ गयी है। |
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