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Home नवं-दिसं 2011 नफे-नुकसान से देश बड़ा
नफे-नुकसान से देश बड़ा पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल
द्वारा लिखित निवेश मंथन   
सोमवार, 26 दिसम्बर 2011 23:55

हिंदी की एक कहावत है - चौबे गये छब्बे बनने, दुबे बन कर लौट आये। अभी यह कहावत केंद्र में काबिज यूपीए सरकार पर शत प्रतिशत खरी उतरती है।

अपनी मृतप्राय छवि को सुधारने के लिए इस सरकार ने देश के खुदरा बाजार में 51% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी देने की घोषणा की। इसकी घोषणा होते ही देश में राजनीतिक भूचाल आ गया। 


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